अनंतकुमार गवई की रिपोर्ट
नवी मुंबई : एशिया की सबसे महत्वपूर्ण कृषि मंडियों में शामिल मुंबई कृषि उपज मंडी (एपीएमसी) में मानसून की पहली बारिश ने ही प्रशासन के दावों की हकीकत उजागर कर दी है। सब्जी मार्केट, प्याज-आलू मार्केट सहित मंडी के कई हिस्सों में जलभराव होने से व्यापारियों, माथाड़ी कामगारों, किसानों और वाहन चालकों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गंदे पानी के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।
इस गंभीर स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अखिल भारतीय माथाड़ी संघ के नवी मुंबई जिला अध्यक्ष पांडुरंग विठ्ठल आमले ने नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे को ज्ञापन सौंपकर मंडी परिसर के सभी आंतरिक नालों की तत्काल युद्धस्तर पर सफाई कराने की मांग की है।
आमले ने कहा कि यदि मानसून पूर्व नालों और जलनिकासी व्यवस्था की समय पर सफाई की गई होती, तो आज एपीएमसी में जलभराव जैसी शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती। पहली ही बारिश में मंडी का यह हाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अभी मानसून के तीन महीने बाकी हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं तथा हजारों व्यापारियों, माथाड़ी कामगारों, किसानों और ग्राहकों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।
उन्होंने आयुक्त से मांग की कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश देकर मंडी परिसर के सभी नालों की तल से सफाई कराई जाए और जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त की जाए, ताकि दोबारा जलभराव की नौबत न आए।
आमले ने कहा कि मुंबई, नवी मुंबई तथा राज्य के विभिन्न जिलों से प्रतिदिन हजारों टन सब्जियां, फल और कृषि उपज एपीएमसी पहुंचती है। ऐसी महत्वपूर्ण मंडी में जलभराव और गंदगी की स्थिति न केवल व्यापार को प्रभावित कर रही है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो माथाड़ी कामगार, व्यापारी और मंडी के अन्य घटक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
