सामाजिक कार्यकर्ता संदीप खांडगेपाटील की मनपा आयुक्त और मुख्यमंत्री से मांग
अनंतकुमार गवई : Navimumbailive.com@gmail.com
नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका द्वारा पिछले कई दिनों से नागरिकों को पीले रंग का दूषित पानी सप्लाई किए जाने के विरोध में सामाजिक कार्यकर्ता संदीप खांडगेपाटीलने महानगरपालिका आयुक्त कैलास शिंदे तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखित निवेदन देकर मई और जून माह का पानी बिल माफ करने की मांग की है।
अपने निवेदन में खांडगेपाटील ने कहा है कि पिछले १८ से २० दिनों से नवी मुंबई के अनेक क्षेत्रों में पीले रंग का दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। नागरिकों और हाउसिंग सोसायटियों द्वारा बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। हालांकि पानी की जांच किए जाने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन वास्तविकता जानने के लिए मनपा अधिकारियों को उसी समय पानी की जांच करनी चाहिए, जब सुबह और शाम नागरिकों के घरों में पानी की आपूर्ति की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सप्लाई किया जा रहा पानी पूरी तरह पीले रंग का है और उसे उबालने के बाद भी उसका रंग एवं गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं होता। खांडगेपाटील ने कहा कि मनपा के वरिष्ठ अधिकारियों, उपायुक्तों, अतिरिक्त आयुक्तों तथा शहर अभियंता को नागरिकों के समक्ष यही पानी पीकर दिखाना चाहिए, ताकि उन्हें यह एहसास हो सके कि नवी मुंबई के नागरिक किस प्रकार का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यदि महानगरपालिका नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो उसे पानी का बिल वसूलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। दूषित पानी के कारण अनेक हाउसिंग सोसायटियों को अतिरिक्त खर्च कर पानी के टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं, जिससे नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
खांडगेपाटील ने यह भी कहा कि हर वर्ष मानसून के दौरान गादयुक्त लाल और मटमैले पानी की समस्या सामने आती है। यदि मनपा प्रशासन अब तक स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो उसे नागरिकों को राहत देते हुए मई और जून माह का जलकर माफ करना चाहिए। जिन नागरिकों से बिल वसूला जा चुका है, उन्हें जुलाई माह के बिल में समायोजन या छूट दी जानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री और मनपा आयुक्त से मांग की है कि जब तक नागरिकों को पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित पानी की आपूर्ति शुरू नहीं होती, तब तक जलकर वसूली पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं। नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
