उरण : करंजा मछुआरा बंदरगाह के विकास के लिए राज्य सरकार ने 136.76 करोड़ रुपये के निधि को मंजूरी दी है। मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे के मार्गदर्शन में मंजूर किए गए इस निधि से करंजा बंदरगाह की वर्षों से लंबित विभिन्न विकास समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इससे रायगढ़ जिले के हजारों मछुआरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
करंजा के स्थानीय मछुआरों ने बंदरगाह में जमा गाद, अतिरिक्त जेट्टी की आवश्यकता और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को लेकर मंत्री नितेश राणे से मांग की थी। मछुआरों की इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए राणे के मार्गदर्शन में राज्य के मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह विभाग ने 21 विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
इन कार्यों की शुरुआत नवंबर महीने से होने की जानकारी दी गई है। इसमें बंदरगाह के प्रवेश मार्ग से गाद निकालना और उसका अतिरिक्त चौड़ीकरण, 370 मीटर लंबी अतिरिक्त धक्का दीवार (जेट्टी) का निर्माण, बंदरगाह का कंक्रीटीकरण तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
गाद की समस्या से मछुआरों को मिलेगी राहत
करंजा मछुआरा बंदरगाह से मछली पकड़ने के मौसम में करीब 550 करोड़ रुपये मूल्य की मछलियों का निर्यात होता है। हालांकि, पिछले दो वर्षों से बंदरगाह में बड़े पैमाने पर गाद जमा होने के कारण मछुआरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
ओहोटी के दौरान गाद के कारण नावों की आवाजाही प्रभावित होती है। मछुआरों को बंदरगाह में मछली उतारने के बाद दोबारा समुद्र की ओर जाने के लिए चार से छह घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार सैकड़ों नावें गाद में फंस जाती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए करंजा मछुआरा संस्था और स्थानीय मछुआरों की ओर से लगातार मांग की जा रही थी।
मंत्री नितेश राणे के समक्ष मछुआरों द्वारा रखी गई इस मांग पर कार्रवाई करते हुए अब विकास कार्यों के लिए निधि मंजूर की गई है।
21 विकास कार्यों को मंजूरी
मत्स्य व्यवसाय विभाग के सहआयुक्त महेश देवरे के अनुसार, करंजा मछुआरा बंदरगाह के विकास के लिए कुल 21 कार्यों को मंजूरी दी गई है।
इनमें प्रमुख रूप से 370 मीटर लंबी अतिरिक्त धक्का दीवार के निर्माण के लिए करीब 26.77 करोड़ रुपये, जबकि प्रवेश मार्ग से गाद निकालने और चौड़ीकरण के लिए करीब 21.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा बंदरगाह में कंक्रीटीकरण, चार लिलाव केंद्र, प्रशासनिक भवन, रेडियो भवन, उपाहारगृह, सुरक्षा कक्ष, कंपाउंड वॉल, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बर्फ फैक्ट्री, 100 टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज, पानी की आपूर्ति, ड्रेनेज एवं सीवेज सिस्टम और डीजल पंप सहित विभिन्न सुविधाओं का निर्माण और विकास किया जाएगा।
इन विभिन्न कार्यों के लिए करीब 88.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
करंजा बंदरगाह के विकास के लिए मंजूर हुए इस बड़े निधि से मछुआरों की लंबे समय से लंबित मांगों को गति मिलेगी और बंदरगाह की मूलभूत सुविधाओं में भी सुधार होगा। मछुआरों की समस्याओं के समाधान के लिए मंत्री नितेश राणे द्वारा किए गए प्रयासों के बाद करंजा बंदरगाह के विकास का रास्ता अब साफ हो गया है।